गलतियां अनजान में हो तो पाप है जानकर हो तो विनाश है

मित्रों जहर तो  जहर ही होता है ,चाहे वह किसी भी रूप में क्यों ना हो । कहा गया है की "आम के पेड़ में कभी इमली नहीं लगती" वैसे ही गलतियां कैसी भी हो उसका फल हमेशा गलत ही होता है। साथियों जब से मनुष्य का जन्म हुआ है तभी से गलतियों का जन्म भी हो जाता है। लेकिन कुछ गलतियां हम अनजान में करते रहते हैं जो ज्यादा हम पर हावी नहीं हो पाती लेकिन नुकसान ही करती हो जबकि कुछ गलतियों को मनुष्य जानबूझकर न्योता देता है। और वह गलतियां रोज रोज ना करके 10 दिन में, 20 दिन में ,1 महीने में या यूं कहें 2 महीने में भी करता है परंतु करता जरूर है। क्योंकि गलतियों को उसने बुलाया है । अगर कोई मना करता है तो यह भी बोलता है कि क्या हुआ हम रोज रोज गलत कार्य करते नहीं है जैसे कि शराब पीना हुआ कोई नशा हुई या बहुत सारी गलतियां गोपनीय होती हैं। मानता नहीं वह करता रहता है याद रहे यह जो गलतियां हम एक समय निर्धारित करके करते हैं यह हमारा विनाश कर देती है यह गलतियां हमें कभी भी ऊपर उठने नहीं देती हमें हमारे लक्ष्यविहिन कर देती हैं और अंत में मनुष्य का विनाश कर देते हैं। ऐसे आपको शायद ना समझ में आया हो आइए हम आपको एक उदाहरण के साथ समझाते हैं
एक माली ने अपने बगीचे में एक पेड़ लगाया माली उस पेड़ की देखरेख में कोई कमी नहीं बरती समय पर पानी खाद निराई गुड़ाई और कीटनाशक दवाएं तक भी उस पौधे को दिया जिस पौधे को उसने अपने बगीचे में लगाया था लेकिन साथ ही साथ एक गलती हो रही थी एक पालतू जानवर चाहे गाय हो, या भैंस हो, या बकरी हो, वह बगीचे में आता था और महीने में एक बार या  20 दिन पर उस पेड़ ऊपर से काट कर खा जाता था यह प्रक्रिया हमेशा चलती रहती थी और वह माली यह सोच रहा था, कि मैं इस पेड़ की देखरेख में कोई कमी नहीं बरत रहा हूं फिर भी यह पेड़ वृक्ष का रूप क्यों नहीं ले रहा लेकिन उसके साथ एक गलती हो रही थी जिसके कारण वह पेड़ कभी भी वृक्ष का रोग नहीं ले सका इसी प्रकार मनुष्य के जीवन में होता है गलती मात्र एक होती है लेकिन उसे कभी भी ऊपर उठने नहीं देती प्यारे साथियों हमें सबसे पहले अपनी गलतियों को खत्म करना है दूर हटाना है दूर भगाना है इसके बाद में अपने ऊपर कार्य करें आवश्यकता है। तभी हम सफल हो पाएंगे नहीं तो उसी पेड़ के समान हमेशा हमेशा के लिए छोटे बने रहे

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