मित्रों इस पृथ्वी पर ऐसा कोई मनुष्य नहीं है जो गलतियां ना करता हो। या जिससे कोई गलती ना होती हो। मनुष्य तो गलतियों का पुतला है और गलतियां ही मानव जाति की कमजोरी होती है। लेकिन जिसने अपनी गलतियों को समय पर समझ लिया, पहचान लिया, और उन्हीं गलतियों को अपनी मजबूती बना लिया उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता हैं। अगर आपसे कोई गलती हो गई है तो कोई बात नहीं, आपको हार मिली है, आप निराश हो गए हो, तो कोई बात नहीं इसमें हताश होने की कोई जरूरत नहीं है। आप फिर से खड़े हो जाओ। जहां हो वहीं से एक नई शुरुआत करो और याद रखो अपने आतीत को दोबारा आने वाले जीवन में वह गलतियां ना हो जो गलती हमने अपने अतीत में की है। और याद रहे एक बार में एक ही गलती को सुधारें। धीरे धीरे एक वक्त ऐसा भी आएगा जब आप अपने आप को पाएंगे कि, आपने कोई गलती नहीं की और आप उस दिन सफलता की उस ऊंची चोटी पर होंगे जो कभी ना तो अपने जीवन में अपने सोचा था और ना ही कभी आशा की थी।
आइए हम आपको एक उदाहरण के साथ समझाते हैं।
एक बहेलिया था। वह प्रतिदिन चिड़ियों को मारता और उन्हें बाजार में बेंचता जो बच जाती उन्हें अपने भोजन के रूप में प्रयोग कर लेता। एक दिन उसकी मुलाकात एक सन्यासी से हुई और सन्यासी ने उसे मना किया कि भाई यह पाप क्यों करते हो बहेलिया ने उत्तर दिया कि यही हमारा व्यवसाय है। और इसी से हमारी रोजी-रोटी चलती है। सन्यासी ने कहा ठीक है आप अपना व्यवसाय करिए लेकिन एक संकल्प लीजिए कि आज से हम कौआ को नहीं मारेंगे। बहेलिया ने कहा ठीक है। अब जब बहेलिया जंगल जाता था शिकार के लिए तो उसके मन में एक डर था कि मैं कौवा को नहीं मारूंगा धीरे धीरे कौवे की तरह उसके मन में सभी चिड़ियों के प्रति दया आ गई और वह एक दिन अपने तीर कमान को उठा कर के अलग रख दिया और प्रण लिया की आज से मै एक भी चिड़िया का शिकार नहीं करूंगा। प्यारे साथियों यह तभी संभव हो पाया जब उसे एक गलती को करने से मना किया और वह बहुत बड़े पाप से छुटकारा पा गया बहेलिए। के जैसे ही आप भी प्रतिज्ञा लीजिए कि एक गलती नहीं करेंगे और एक दिन ऐसा आएगा जब आप गलती विहीन हो जाएंगे और आप स्वयं विजेता बन जाएंगे।
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