सज्जनों अगर पानी में बहाव नहीं तो उस पानी से बदबू आने लगती है। कई लोगों को अपने घर को छोड़ने बहुत परेशानी होती है। उन्हें अपने वातावरण से दूसरे वातावरण जाने में बहुत दुख होता है। बहुत लोग तो ऐसे होते हैं कि, बड़े बड़े मौके केवल घर को ना छोड़ने के कारण त्याग देते हैं। साथियों अगर सच में सफल होना है या फिर अपनी अलग पहचान बनानी है कुछ बड़ा करना है तो सबसे पहली शर्त यही है कि, आपको अपना वातावरण छोड़कर दूसरे वातावरण में जाना पड़ेगा तभी आप कुछ बड़ा कर पाएंगे। इसका मतलब यह भी नहीं की अगर आप अपना घर नहीं छोड़ते हैं तो आप कुछ नहीं कर पाएंगे। आप कुछ ना कुछ तो करेंगे जरूर पर जितना आप बाहर जा कर के कर पाएंगे। अपने आप को निखार पाएंगे,अपना विकास कर पाएंगे, उसकी तुलना में आप अपने निजी वातावरण में रहकर बहुत कम ही कर पाएंगे क्योंकि जब आप घर पर रहते हैं और आप अपने सगे संबंधियों के बीच में रहते हैं तो आपके अंदर सब कुछ अच्छा ही दिखाई देता है। आपकी छोटी-छोटी गलतियों को मजाक में ले लिया जाता है और आपकी प्रशंसा होती रहती है। लेकिन जब आप बाहर जाते हैं किसी दूसरे वातावरण में तब आप की एक छोटी गलती भी आपको एक पहाड़ के बराबर दिखाई पड़ती है क्योंकि बाहर आपका कोई इतना सगा संबंधी नहीं है कि तुम्हारी गलतियों को माफ करे वह तो हमेशा तुम्हारी आलोचना करने में ही रहेगा लेकिन वही आलोचनाओं को अगर तुम अपनी मजबूती बना ली अगर सभी आलोचनाओं को तुमने सकारात्मक सोच में लिया तो विश्वास करो तुमसे बड़ी सफलता कोई नहीं पाएगा।
आइए हम आपको एक उदाहरण के साथ समझाते हैं
आप लोगों में से बहुतों को यह पता होगा कि जब किसान धान की खेती करता है, तब वह सबसे पहले धान के बीज को एक स्थान पर बुवाई कर देता है। फिर उन पौधों को उखाड़ कर किसी दूसरे खेत में रोपाई करता है। और वही पेड़ जब दूसरे खेत में आते हैं तब पहले तो थोड़ा मुरझा जाते हैं लेकिन कुछ दिनों के बाद वही पेड़ों से अनेक कोपले निकलती हैं और धान की फसल बहुत अच्छी होती है और जिस खेत में धान के बीज की बुवाई हुई थी कुछ पेड़ वहां पर भी लगे हुए थे जिन्हें नहीं उखाड़ा गया था किसान ने दोनों खेतों में बराबर खाद लगाई समय-समय पर पानी दिया उसकी निराई भी करवाई लेकिन होता क्या है जो पेड़ों को उखाड़ कर दूसरे खेतों में लगाया गया था एक पेड़ों में 20 से 30 कोपले निकलती है और जिन पौधों को उन्हीं के वातावरण में रखा गया था उन पौधों में 3 से 5 कोपलें ही निकली थी। खाद्य पानी निराई किसान सब एक हैं थोड़ा सा फर्क है स्थान का, वातावरण का जो एक खेत में 20 से 30 कोपले और दूसरे खेत में 3 से 5 कोपले ही हुई। यह तो रही बात धान की। और हम सभी मनुष्यों के साथ भी ऐसा ही होता है। जब तक हम अपना निजी वातावरण नहीं छोड़ेंगे तब तक हम सफलता के उस छोर पर नहीं पहुंचेंगे जो सफलता मेरे लिए बनी है
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