पैसा ही सब कुछ नहीं पैसा भी सब कुछ होता है

सज्जनों हर मनुष्य की एक बुनियादी जरूरत होती है। और उन आवश्यकता को पूरा करने के लिए धन की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। क्योंकि अगर आपके पास धन नहीं होगा तो आप अपनी आवश्यकता को पूरी नहीं कर सकते यह लेख शायद उन लोगों को भी पसंद नहींं आएगा जो लोग पैसों की अहमियत को नहीं समझते हैं। क्योंकि इस लेख में पैसों की बात की गई है। हां यह भी सत्य है कि, पैसों से सब कुछ खरीदा नहीं जा सकता है। लेकिन यह भी सत्य है कि, पैसा से भी सब कुछ खरीदा जा सकता है। वर्तमान समय में पैसा बहुत कुछ है वर्तमान ही क्यों ? कोई भी समय हो कभी भी हो हम पैसों से बहुत कुछ खरीद सकते हैं। हां बहुत सारी चीजें हैं जो हम पैसों से नहीं खरीद सकते यह भी सत्य है। हां हम पैसों से डर खरीद सकते हैं इज्जत नहीं, हां पैसों से हम भीड़ एकत्र कर सकते हैं लेकिन प्रेम नहीं, हां हम पैसों से बहुत सारे व्यंजन खरीद सकते हैं लेकिन भूख नहीं, यह भी सत्य है और यह भी सत्य है कि जिस स्थिति में हम पैसे को ही सब कुछ नहीं मानते पैसों से परे हो जाते हैं उस स्थिति में पहुंचने तक अगर सबसे ज्यादा किसी का योगदान रहा तो वह धन है अर्थ है। बहुत लोग कहते हैं की पैसों की कीमत कुछ नहीं है हां भाई हो सकता है तुम्हारे लिए लेकिन उनसे पूछिए पैसों की कीमत जिनके पास अर्थ नहीं है उन्हें एक वक्त की रोटी कोई नहीं देता, उनसे पूछिए पैसों की कीमत जिनके पास पैसा ना होने के कारण अपनों को खो दिया, अरे उस लड़के से पैसों की कीमत पूछिए जिसकी महबूबा कहती थी की बाबू हम दो लोगों का शरीर अलग-अलग है पर मन एक है आत्मा एक है। लेकिन जब बात अर्थ की आई तो हमेशा हमेशा के लिए छोड़ कर चली गई, उनसे पूछो पैसों की कीमत क्या होती है। उनसे पूछिए जो पैसों के लिए अपने सगे संबंधियों को छोड़ दिए उनसे पूछे पैसों की कीमत क्या होती है। पैसा बहुत कुछ होता अगर आपके पास पैसा होगा तो आपको बिना कहे इज्जत शोहरत सब कुछ मिलेगा अगर आपके पास पैसा होगा तो आपकी छोटी गलती एक मजाक लगेगी, आप की फटी पेंट एक फैशन लगेगा। और अगर आपके पास अर्थ नहीं है तो वही सब लोग आप की स्थिति देखकर घृणा करेंगे। इसलिए पैसा बहुत कुछ होता है हां यह भी सत्य है कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता है। लेकिन यह भी अटल सत्य है कि पैसा भी सब कुछ होता है। इस पूरे लेख में दो शब्दों पर पूरा जोर दिया गया है एक तो है "ही" और दूसरा शब्द है "भी" ही और भी दो शब्दों का खेल है। 
चलिए हम आपको एक उदाहरण के साथ समझाते हैं
आपका एक बहुत प्रिय मित्र है जिसे आप बहुत प्यार करते हैं। उसकी हर बात में हां में हां भरते हैं। दिन में कई बार उससे मुलाकात करते हैं। और हर वक्त उसकी प्रशंसा भी करते रहते हैं। अगर कहीं बाहर चले गए तो फोन पर भी उससे बात करते हैं। और साथ ही दूसरा व्यक्ति हैं जो आपकी मित्र से ना तो बात करता है ना तो आपके मित्र को फोन करता है ना ही आपके मित्र को वह समय देता है मतलब आपकी मित्र से उसका कोई संबंध नहीं है। और एक वक्त आया की आपके मित्र की तबीयत बहुत खराब हो गई उसके पास जितना पैसा था उसने सब दवा में लगा दिया अब वह सहायता मांगने के लिए आपके पास आया और आपने सीधे हाथ खड़े कर दिए कि, भाई साहब मैं आपकी कोई सहायता नहीं कर सकता हूं क्योंकि मेरे पास पैसा नहीं है। और यह बात उस व्यक्ति के पास गई जो व्यक्ति आपके मित्र से कोई मतलब नहीं रखता था। और उस व्यक्ति ने तुम्हारे मित्र की सहायता की, मतलब उसने उसे जितनी पैसों की  आवश्यकता थी उसने उसे पैसा दे दिया और वह स्वस्थ होकर के वापस घर आ गया। अब वही आपका मित्र आप से दुश्मनी तो नहीं करेगा। लेकिन अब आप भी समझ सकते हैं कि आपका मित्र आप से ज्यादा मतलब रखेगा कि उससे जिसने उसे पैसा दिया था। उसी से ज्यादा मतलब रखेगा यहीं पर आप पैसों की कीमत समझ जाएंगे इसलिए प्रिय साथियों धन अर्जन करो हां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हम किसी का गला काट कर अपना ईमान बेच कर पैसा नहीं कमाएंगे लेकिन अनावश्यक समय बर्बाद करने से अच्छा है कि आप पैसा कमाने में अपना वक्त लगा दे और जब आपके पास पैसा होगा तब आप जो चाहेंगे वह आप खरीद सकते हैं वह आप आ सकते हैं।

Comments