जब तक टूटोगे नहीं, तब तक उठोगे नहीं।

मित्रों कहावत बहुत पुरानी और बहुत प्रचलित है। कि नया पेड़ बनाने के लिए बीज को टूटना पड़ता है आपने देखा होगा, जब आप कोई बीज को जमीन में बोते हैं, तब देखते हैं कि जब नया पौधा उगता है तो, बीज के दो टुकड़े कर देता है।
 आपको शायद ऐसा न समझ में आए। जब हमारे ऊपर परेशानियां आती हैं दुख आता है तो हम स्वयं से, अपनों से, अपने मित्रों से, अपने रिश्तेदारों से, सभी लोगों से कहीं ना कहीं टूट जाते हैं। और जब हम सभी लोगों से टूट जाते हैं तब हमारे अंदर एक आग पैदा होती है। 
 और हम कहते हैं कि मैं कुछ बनकर, कुछ करके समाज को दिखाऊंगा। होता भी है जब हमारे ऊपर दुख पड़ता है तब हम अपने आप को पहचानते हैं। कि हम कितने मजबूत हैं, कितने ताकतवर हैं, हमारे अंदर क्या-क्या खूबियां हैं। और हम क्या क्या कर सकते हैं। लेकिन संभव तब होता है जब हम टूटते हैं।
अगर अखरोट को तोड़ा ना जाए तो बाहर से दिखने में एक लकड़ी जैसा लगता है लेकिन जब उस अखरोट को हम तोड़ते हैं तब पता चलता है कि इसके अंदर कितनी  पौस्टिक हैं जो हमारे सेहत के लिए कितना लाभदायक है। लेकिन अगर हम अखरोट को ना तोड़ते तो पता नहीं चलता, उसे लकड़ी मानकर हम छोड़ देते। वैसे ही जब मनुष्य स्वयं टूटता है तब पता चलता है कि उसके अंदर क्या कर गुजरने की क्षमता है।
 मनुष्य को वक्त-वक्त पर टूटना भी जरूरी है और ठोकर लगना भी जरूरी है। क्योंकि जब तक ठोकर नहीं लगेगी तब तक हम संभल कर नहीं चलते और जब एक बार ठोकर लग जाती है तब हम दोबारा संभल कर चलते हैं। अगर जीवन में परेशानियां आती हैं तो उन परेशानियों को देखकर हमें भागना नहीं गए 
क्योंकि दही से मक्खन को निकालने के लिए दही को चोट खाना पड़ता है और लगातार चोट खाना पड़ता है तब जाकर कहीं मक्खन निकलता है वैसे ही हम सभी मनुष्यों के अंदर अनन्त ऊर्जा भरी पड़ी है। उस उर्जा के लिए हमें लगातार ठोकरे, लगातार चोट खाना पड़ेगा और टूटना पड़ेगा। टूटने के बाद ही वह उर्जा सामने आती है। एक और उदाहरण के साथ आपको हम समझाते हैं।
 सरसो को देखा होगा अगर सरसो को बाहर से देखा जाए तो कोई नहीं बता सकता कि, इसके अंदर इतना पोस्टिक तेल भरा है। लेकिन जब वही सरसों कोल्हू पर जाती है और उस सरसो की कोल्हू में पेराई होती है। तब जाकर उस सरसों से पौष्टिक तेल निकलता है।
और उस तेल के अनेकोंनेक उपयोग किया जाते हैं। वैसे ही हम सभी मनुष्यों को ठोकर रूपी, दुख रूपी, कोल्हू  में पहले टूटना पड़ेगा उसके बाद तेल रूपी सफलता मिलेगी जो हमारे साथ साथ समाज के लिए भी एक मिसाल बनकर खड़ी होगी।

Comments