कोई तुम्हारा अपना नहीं है।

इस समाज में या यूं कहें कि इस संसार में या इस वसुंधरा पर तुम्हारा कोई अपना नहीं है। 
सभी का अपना अपना स्वार्थ है परस्वार्थी कोई नहीं है। सभी के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ जुड़ा हुआ है और लोग उसकी स्वार्थ के लिए एक दूसरे को अपना मानते हैं जब तक किसी का किसी के पीछे कोई स्वार्थ रहता है। तभी तक वह उसका रहता है ज्यों स्वार्थ खत्म त्यों रिश्ते खत्म सभी रिश्तो के पीछे स्वार्थ है। यूं कहें की सभी लोग एक दूसरे का शोषण करते हैं तुम्हारा अपना क्या है जानना चाहोगी अगर जानना चाहते हो तो तुम्हारा अपना केवल चैतन्य है। चैतन्य के सिवा और कुछ नहीं है तुम्हारा। 
एक बेटा अपने बाप का पैसों के लिए शोषण करता है,
 एक भाई अपने सुरक्षा के लिए भाई का शोषण करता है, एक प्रेमी अपने प्रेमिका के जिस्म का शोषण करता है सच कहें तो सभी लोग एक दूसरे का शोषण ही करते हैं। आज के समय में लोग किसी को अपना मान बैठे पर सच्चाई तो यह है, कि कोई अपना नहीं है। भाई तुम अकेले जन्म लिए थे अकेले मरोगे तुम ही। केवल तुम अपने कर्मों के जिम्मेदार हो कोई तुम्हारा नहीं है 

 जो तुम्हारे कर्म है अच्छे हो या बुरे वही तुम्हारे अपने हैं। और इस संसार में तुम्हारा कोई अपना नहीं जब तुम कहते हैं कि वह मेरा तो इसका मतलब यह सत्य है कि वह तुम्हारा नहीं है क्योंकि जो तुम्हारा है उसे कहने की आवश्यकता ही नहीं कि वह हमारा है। जो तुम्हारा है ही नहीं उसे तुम कितना भी कहो यह मेरा है लेकिन वह तुम्हारा नहीं हो सकता। तुम ही वह अकेले बंदे हो जो अपने हो स्वयं के हो और इस वसुंधरा पर तुम्हारा कोई नहीं है। 

इसीलिए तुम अपने कर्मों को सुधारो क्योंकि तुम्हारे साथ तुम्हारे कर्म ही जाएंगे और तुम्हारे जाने के बाद भी तुम्हारे कर्म ही इस समाज में बचेंगे और उन्हीं कर्मों से तुम जाने जाओगे

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