अंत नहीं, शुरुआत है अंधेरा।

दुनिया में जितने भी लोग आज सफल हुए हैं, या फिर सफलता की तरफ अग्रसर हैं। उन्होंने शुरुआत अंधेरे से ही की है अंधेरा अंत नहीं होता है, अंधेरा तो शुरुआत का दरवाजा है।
 एक ऐसा दरवाजा जिसे खोलने के बाद प्रकाश का आगमन होता है, सुबह का आगमन होता है। क्योंकि जब तक जीवन में अंधेरा नहीं आएगा तब तक आपको उजाले की कीमत का पता नहीं चलेगा।  जिस उजाले को आपने अंधकार में तब्दील कर दिया है उसकी क्या कीमत है।

 अंधकार रूपी ठोकरें ही आप को मजबूत करती हैं प्रकाश में चलने के लिए। अंधकार से कभी भी किसी का अंत नहीं हुआ है। हर एक की शुरुआत अंधकार से होती है अगर आप हमेशा प्रकाश में रहे तो आप कभी भी अपना पूर्ण विकास नहीं कर पाएंगे। वैसे! जैसे एक बीज को अगर धूप में हमेशा के लिए छोड़ दिया जाए तो वह कभी भी नया पेड़ नहीं बन पाता। उसे पेड़ बनने के लिए मिट्टी के अंदर अंधेरे में जाना ही पड़ता हैं। फिर वह उजाले में आता है,और वृक्ष का रूप ले लेता है।
उसी प्रकार जब तक आपके जीवन में अंधकार रूपी काल नहीं आएगा, तब तक आप को प्रकाश रूपी महाकाल का दर्शन नहीं हो सकता है। जब हमारी शुरुआत ही अंधेरे से हुई है तब आपको अंधकार से डर कैसा?

 क्योंकि जब आप बहुत छोटे थे तब आपको लिखने पढ़ने के लिए काली सिलेट मिली, जब आप थोड़ा बड़े हुए तब किताबों पर काले अक्षर मिले पढ़ने के लिए और आज जब आप जवान हुए हैं तो आपको काला कोट पैंट मिला पहनने के लिए।
 यूं कहें कि हमारी शुरुआत ही काले से हुई है और जब तक आप अंधकार से परिचित नहीं होंगे तब तक आप उजाले को पहचान नहीं पाएंगे। इसीलिए अंधेरा आपके जीवन का अंत नहीं, शुरुआत होता है।

 जब जब भी आपके जीवन में कभी किसी भी प्रकार का कोई अंधकार आए तब तब आप समझ जाना कि अब आपके जीवन की एक नई शुरुआत होने वाली है एक नया अध्याय शुरू होने वाला विश्वास के साथ आप अंधकार का डटकर सामना करें वही अंधकार आपको प्रकाश में ले जाएगा 

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