धैर्य

नदी में जिस स्थान पर जल की गहराई ज्यादा होती है, वहां पानी का बहाव कम होता है। और जिस स्थान पर पानी की मात्रा कम होती है वह पानी का बहाव ज्यादा होता है।

लेकिन जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में होता है वहीं पर जलीय जीव जंतु जैसे मछली मगरमच्छ व अन्य जीव भी पाए जाते हैं जहां पर पानी कम मात्रा में पाया जाता है वहां पर धूल मिट्टी के सिवा और कुछ नहीं रहता है।

 मानव जीवन में भी धैर्य नदी के गहरे पानी जैसे हैं मनुष्य जितना धैर्यवान होगा वह उतना ही गुणवान और शक्तिशाली होगा। 

एक बार महात्मा बुद्ध जीअपने शिष्यों के साथ भ्रमण पर निकले थे जाते-जाते रास्ते में उन्हें कई सारे गड्ढे मिल रहे थे। तब उन्हीं के शिष्यों में से आनंद नाम के शिष्य ने पूछा कि प्रभु इतने गड्ढे एक ही साथ क्यों हैं।

 फिर मुस्कुराते हुए महात्मा बुद्ध जी ने उत्तर दिया कि आनंद एक व्यक्ति जिसे जोरों की प्यास लगी हुई थी वह पानी के लिए कई सारे गड्ढे खोदे लेकिन उसे पानी नहीं मिला और उसकी मृत्यु हो गई I
 अगर वही व्यक्ति एक ही गड्ढे को धैर्य पूर्वक खोदता तो उसे पानी जरूर मिल जाता लेकिन, उसके पास धैर्य ना होने के कारण वह ऐसा करने में सक्षम नहीं हुआ।

 जिससे भी मनुष्य के अंदर धैर्य नहीं है उन सभी मनुष्यों के साथ ऐसा ही होता है जैसा इस मनुष्य के साथ हुआ है अगर धैर्य पूर्वक कोई भी कार्य किया जाए तो इस दुनिया में ऐसा कोई कार्य नहीं है जिसे पूरा नहीं किया जा सकता है 

इसीलिए कहा गया है कि धैर्य मनुष्य की सफलता की कुंजी है बिना धैर्य के मनुष्य वैसे ही होता है जैसा  बिना फल फूल का वृक्ष।

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