बहराइच एक नजर

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बहराइच जिला उत्तर प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित है। या भारत के पड़ोसी देश नेपाल की सीमा से मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार बहराइच का पुराना नाम ब्राह्म इच था जो कि बाद में बहराइच हो गया बहराइच में एक  रिसिया नाम का स्थान है जो पहले ऋषि भूमि के नाम से प्रसिद्ध था। बाद में रीसिया हो गया।

 कहा जाता है कि यहां स्वयं ब्रह्मा जी ऋषियों से चर्चा परिचर्चा करने आते थे और बहराइच कभी ब्रह्मा जी की परिचर्चा स्थल रहा करता था।

 मध्यकाल में बहराइच में ही महर्षि बलार्क तथा हिंदू सम्राट राजा सुहेलदेव जी की कर्मभूमि रही है। आज भी राजा सुहेलदेव जी के द्वारा बनवाई गई झील, चित्तौड़ झील के नाम से है।

यहीं पर राजा सुहेलदेव ने 1030 ईस्वी में मुस्लिम आक्रांता सैयद मसूद गाजी जोकि मोहम्मद गजनवी का सेनापति था जिसे युद्ध में मार गिराया था जिस की मजार आज भी गाजी मियां के नाम से बहराइच के उत्तरी शहर में बनी हुई है।

 बहराइच में एक घंटाघर है जो बहराइच के बीच शहर में बना है जिसे अंग्रेजों ने बनवाया था कहा जाता है। कि घंटाघर जिस पत्थर का बना हुआ है उस पत्थर के मात्र दो ही घंटाघर हैं एक बहराइच में और दूसरा लंदन में हैं 

बहराइच में अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र है और यहां पर दो नदियां बहती हैं एक गंगा घाघरा और दूसरी सरयू जो आगे जाकर की एक हो जाती हैं।

प्रशासन
बहराइच में प्रशासनिक रूप से बहुत अच्छा तो नहीं कह सकते क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र अधिक होने के कारण यहां पर बहुत सारी परेशानियों का सामना ग्रामीण लोग करते हैं फिर भी जितना संभव हो पाता है उतना प्रशासन अपना योगदान देता है राजनीति की बात करें तो यहां पर यहां पर सभी नेता अपने जेब भरने में लगे रहते हैं विकास के नाम पर बिलकुल जीरो है।

अन्य सुविधाएं

अगर बाद सरकारी सुविधा में की की जाए तो सरकार की जितनी भी योजनाएं आती हैं वह रास्ते में ही रह जाती हैं गांव तक बहुत कम ही पहुंच पाती हैं इन क्षेत्रों में पानी की तो कमी नहीं है क्योंकि यहां पर दो नदियां बहती हैं और बिजली को हमेशा परेशानी बनी रहती है कभी कबार हफ्तों तक बिजली के दर्शन नहीं होते मेडिकल के क्षेत्र में लगभग सही है।

ट्रेडीशन

बहराइच क्षेत्र की एक सबसे पुरानी अच्छी रिवाज है कि रामनवमी के दिन ग्रामीण क्षेत्रों में सभी लोग एक जगह एकत्र होते हैं और वह पर माता काली के नाम से खप्पर चढ़ाया जाता है लोग कहते हैं कि मां कालिका हमारी रक्षा करती हैं और साथ ही साथ जलती हुई आग में त्रिशूल को रखकर उसी त्रिशूल से अपने जीवा में छेद करते हैं जो अपने आप पूर्ण हो जाता है।

यह बहुत चमत्कारिक दृश्य रहता है यहीं पर एक बुढ़वा बाबा के नाम से प्रसिद्ध मंदिर है जहां पर वैशाख की अमावस्या को बहुत प्रसिद्ध मेला लगता है यहीं पर जो श्रद्धालु अपनी मन्नतें मांगते हैं और पूरी हो जाने पर अपनी जीवा को काटकर शिवलिंग पर चढ़ा देते हैं जो कुछ समय के बाद अपने आप पूर्ण हो जाती हैं या अभी किसी चमत्कार से कम नहीं है।
त्यौहार
बहराइच में लगभग सभी त्योहार मनाया जाते हैं कृष्ण जन्माष्टमी और राम में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है शादी एक मुस्लिमों का त्यौहार ताजिया के नाम से मनाया जाता है जिसमें कागज की एक पिरामिड रुपए मूर्ति रहती है।

 जिसे श्मशान घाट में ले जाकर दफना देते हैं और वहीं पर मेला लगता है साथ ही हिंदुओं में गुरु पूर्णिमा के दिन भंवरी के नाम से एक प्रसिद्ध त्योहार है जो मनाया जाता है इस दिन भंवरी और चोखा बना कर लो खाते हैं।
शिक्षा
बहराइच शिक्षा के क्षेत्र में काफी विकसित स्थान है यहां पर महर्षि बल आर्य कन्या महाविद्यालय और किसान पीजी कॉलेज के साथ-साथ और भी कई सारे स्कूल और कॉलेज महाविद्यालय हैं।

 तो यूं कह सकते हैं कि शिक्षा की दृष्टि में काफी विकसित स्थान है उनके बहराइच से कई सारे डॉक्टर इंजीनियर के साथ-साथ आईएएस और आईपीएस का भी सिलेक्शन होता है इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में भारत बहुत सही है।

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