हवस शब्द सुनने में तो बहुत गलत फील होता होगा कि, क्या यह शब्द ,यह कैसा शब्द है, इसकी तो मीनिंग बहुत गलत होती है।
अपनी-अपनी सोच है एक कहावत बहुत अच्छी है कि "मनुष्य जैसा चश्मा लगाता उसे दुनिया वैसी ही दिखती है" हवस शब्द का अर्थ हमारे अनुसार अगर देखा जाए तो यह हवा से बना हुआ है आपने देखा होगा की हवा एक ऐसी शक्ति, ताकत है। जो थोड़ी सी जगह पा जाए वहां से निकल जाती है।
और जब बयार जब चलती है तो सामने कितनी भी बड़ी परेशानियां खड़ी क्यूं न हो उनको चीरती हुई आगे निकल जाती है हवा को कभी कोई रोक नहीं पाता है वह हमेशा हमेशा चलती रहती है।
वैसे ही जब हमारे विचारों में किसी के प्रति हवस होती है तब हम उसी हवा के जैसे सारी परेशानियों को चीरते हुए आगे निकल जाते हैं।
जब हवस आपको नौकरी के प्रति चढ़ती है तब आप दिन रात एक कर के पढ़ाई करते हैं तैयारी करते हैं और एक दिन वही हवस आपको आपके सपनों तक पहुंचाती है।
हवस जब भूंख की होती है, तब कैसे भी किसी भी कीमत पर जब तक आप खाना नहीं खा लेते हैं आपका पेट नहीं भर जाता है तब तक आप की हवस बुझती नहीं है। वैसे ही जब हमारे अंदर हवस पैदा होगी कि हमें अपना बिजनेस खड़ा करना है हमें अच्छी नौकरी लेना है हमें अपनी बॉडी बनानी है तब आप शांत नहीं बैठेंगे जब तक कि आपने मन में जो आपने सपने सजाया है वह सपना पूरा ना हो जाए तब तक।
मित्रों अपने अंदर हवस को जगाए सकारात्मक रूप से अपने सोए हुए यौवन को जगाए।
स्वामी विवेकानंद ने बहुत अच्छी बात कही है "सिंघो उठो यह मत समझो कि तुम भीड़ हो" मित्रों उठो जागो अपने आप को पहचानो, अपने सपनों को पहचानो, अपने ताकत को पहचानो।
जब तक तुम समाज में उतरो ही नहीं तब तक तुम्हें कैसे पता चलेगा कि हमारे अंदर क्या पोटेंशियल है जब आप फिल्ड में उतरेंगे तभी तो आपको पता चलेगा कि हमारे अंदर क्या बुराई है, क्या अच्छाई है, क्या मेरी कमजोरी है, क्या मेरी मजबूती है, और यह सब करने के लिए आपको अपने अंदर की हवस को जगाना पड़ेगा।
मित्रों अपने सपनों से दोस्ती नहीं प्रेम करें क्योंकि जब आप किसी से प्रेम करते हैं तब आप उसके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं सामने भले ही क्यों ना मौत खड़ी हो उसे भी लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं आप अपने सपनों से प्यार करिए और यही प्यार आपको इस ऊंचाई पर ले जाएगा जिसे आपने कभी सोचा भी नहीं होगा।
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