गौशाला का पैसा जा रहा बिचौलियों के पेट में।

भारत सरकार ने भले ही गौ हत्या या गोकशी बंद कर दी हो लेकिन उसका मुआवजा किसान को अपनी खेतों की फसलों के रूप में देना पड़ता हैं।  उत्तर प्रदेश सरकार ने लगभग हर ब्लाक में गौशाला बनवाने के लिए लाखों रुपया खर्च करती है और वह गांव गौसला केवल कागजी स्तर पर बनते हैं लेकिन उनकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

 यह बात है उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में ब्लॉक  मिहिंपुरवा की।यह क्षेत्र कर्तनिया घाट सेंचुरी के अंतर्गत आता है यहां पर अनेक प्रकार के जंगली जानवर जैसे हिरण नीलगाय और बारहसिंघा जैसे जानवर पाए जाते हैं जो पहले से ही किसानों की फसलों का दोहन करते आ रहे हैं। लेकिन अब जब से गोकशी बंद हुई है तब से लोग गाय का दूध खाकर उसे छोड़ देते हैं 
वही गाय किसानों की फसलों को नष्ट कर रही हैं जिसके चलते किसानों ने अपने खेतों की कटीली तार से घेराई कर रखा है और यह तार के वजह से गायों के पैर व अन्य शरीर कट जाती है जिसके कारण गाय के शरीर में कीड़े तक भी बढ़ जाते हैं गायों के लिए गौशाला में अच्छी व्यवस्था ना होने के कारण गाय सड़कों पर बैठती हैं  कई बार कार बस के नीचे आ जाती हैं जिनके कारण उनकी मृत्यु भी हो जाती है और बहुत बुरी स्थिति हो गई है।

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 गायों की इस क्षेत्र में तीन गौशाला भी बने हुए हैं यह गौशाला है गुड गांव में दूसरा है शायपुर में तीसरा है अमृतपुर में तीनों को गौशाले केवल कागजी स्तर पर चल रहे हैं यहां पर ना तो कोई गाए हैं और ना ही गाय के रखवाले।

 सरकार लाखों रुपया गौशाला के पीछे खर्च करती है लेकिन वह पैसा बिचौलियों के जेब में चला जाता है जिसका फायदा ना तो किसान पाते हैं और ना ही जिनके लिए पैसा आता वो। इन गौशालाओं के रखवाले ग्राम प्रधान है जब कोई किसान उनके पास जाता है और पूछता है कि भाई गौशाला में गाय नहीं है गाय इधर उधर दूसरों का नुकसान करती हैं तो प्रधान सीधे शब्दों में बोल देता है कि भाई मैं क्या करूं पैसा नहीं आता है मैं इस क्षेत्र का एक समान व्यक्ति होने के कारण मैं प्रशासन से आग्रह करता हूं कि वह इन सभी क्षेत्रों के गौशालाओं की स्थिति को संभाले और यहां के बिचौलियों को उनके भाषा में जवाब देकर उनके ऊपर कानूनी कार्यवाही की जाए।

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