वर्तमान समय में दुनियाभर के देश अपने इकोनामी मानवता संस्कृति एवं सुरक्षा के लिए नए-नए अविष्कार करते हैं नई-नई खोजें करते हैं लेकिन वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो अफगानिस्तान में तालिबानो ने अपने बंदूकों के खौफ से अपने वर्तमान और भविष्य की तलाश में लगे हुए हैं।
स्रोत हिंदी न्यूज़ 24
अगर बाद भारत की की जाए तो भारत हमेशा से किसी भी प्रकार के आतंकवाद या हिंसात्मक गतिविधियों से कोसों दूरी बनाए रखा है इस वर्ष जब भारत अपने आजादी का महोत्सव मना रहा था तो अब इसी समय दक्षिणी एशिया में उसके पड़ोसी देश अफगानिस्तान पर एक बार फिर से तालिबानियों ने कब्जा कर लिया है।
90 के दशक से तालिबानियों के आतंकवाद से अफगानिस्तान अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंता में है उसकी चिंता को तालिबानियों ने और भी बढ़ा दिया है तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा होना भारत के लिए भी कहीं ना कहीं चिंता का विषय है हां यह सत्य है कि अफगानिस्तान में तालिबान कभी भी भारत के खिलाफ सीधे तौर पर कोई गलत कदम नहीं उठाया है लेकिन जैसे मोहम्मद लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का तालिबान को मिलता साथ भारत के साथ-साथ अन्य देशों के लिए भी एक खतरा बन सकता है।
अलकायदा के फिर से मजबूत होने के संकेत भी भारत और विश्व के शांति को भंग कर सकते हैं यूएस और यूके के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद ओसामा बिन लादेन व पूर्व सहयोगी व अलकायदा कमांडर असीम उल हक अफगानिस्तान में देखा गया है।
भारत और अफगानिस्तान की स्थिति कहीं ना कहीं एक जैसी मिलती हैं क्योंकि भारत को तालिबान से डर नहीं है लेकिन तालिबान के पीछे छिपे पाकिस्तान से कहीं ना कहीं खतरा है क्योंकि पाकिस्तान हमेशा तालिबान के साथ रहा है तालिबान ने सीधे शब्दों में कह दिया है कि हमें भारत से अच्छे व्यवहार अच्छे संबंध रखने भारत के प्रति हमारी अंदर कोई भी छल कपट नहीं है लेकिन फिर भी तालिबान पाकिस्तान का मित्र है तो यूं कह सकते हैं कि तालिबान तो कुछ नहीं करेगा लेकिन पाकिस्तान तालिबान को अपनी ढाल बनाकर हमें खतरा पहुंचा सकता है इसलिए हमें हमेशा तालिबान को ना देखते हुए उसके पीछे छिपी हुई उनके मित्रों से होशियार रहना है।
Comments
Post a Comment