मानव जाति दिनोंदिन अनेक प्रकार की सफलताएं अपने खाते में डाल रहा है धरा से लेकर चांद तक अपना परचम लहरा रहा है लेकिन साथ ही साथ प्राकृतिक से भी दूरी बना रहा है।
लगातार जनसंख्या एवं शहरीकरण के कारण दिन प्रतिदिन हजारों एकड़ जंगल बंजर में शहरों में और इंडस्ट्री में बदले जा रहे हैं जिसके कारण जलवायु परिवर्तन रूपी कालचक्र मनुष्य की जीवन लीला समाप्त करने के नजदीक पहुंच रहा है ।
स्रोत- अमर उजाला
संयुक्तर ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग तेज हो रही है और इसके लिए साफ़ तौर पर मानव जाति ही ज़िम्मेदार है. इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पृथ्वी की औसत सतह का तापमान, साल 2030 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा. ये बढ़ोतरी पूर्वानुमान से एक दशक पहले ही जाएगी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ते तापमान से दुनिया भर में मौसम से जुड़ी अनेक प्रकार की भयंकर आपदाएं आएंगी, दुनिया पहले ही, बर्फ की चादरों के पिघलने, समुद्र के बढ़ते स्तर और बढ़ते अम्लीकरण में अपरिवर्तनीय बदलाव झेल रही है। और वायुमंडल को गर्म करने वाली गैसों का उत्सर्जन जिस तरह से जारी है, उसकी वजह से सिर्फ दो दशकों में ही तापमान की सीमाएं टूट चुकी हैं।
शोधकर्ताओं की मानें तो इस शताब्दी के अंत तक समुद्र का जलस्तर लगभग दो मीटर तक बढ़ सकता।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेश का कहना है कि 'आईपीसीसी वर्किंग ग्रुप की पहली रिपोर्ट मानवता के लिए ख़तरे का संकेत है.'अगर वक्त के रहते हुए जलवायु परिवर्तन पर ध्यान ना दिया गया तो जब समय निकल जाएगा तब कोई कुछ नहीं कर सकता जलवायु परिवर्तन बड़े काल से बचने के लिए ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी करना पड़ेगा और अधिक से अधिक ग्रीन बेल्ट को बढ़ावा देना होगा तभी जलवायु परिवर्तन को रोक सकते हैं।
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